अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। श्रीमती लक्ष्मी चौहान

 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

हम बात करेंगे महिलाओं की।

          बेडियों में बँधी और

          जंजीरों में जकडी़,

           महिलाओं की नहीं,अपितु

           देहरी के बाहर कदम रखती

          स्वाभिमानी,कामकाजी महिलाओं की।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

हम बात करेंगे महिलाओं की। 

            परदे में छुपी और

             घूँघट में ढकी

             महिलाओं की नहीं,अपितु

             अत्याचार से लड़ती,

          सीनातान कर चलने वाली महिलाओं की।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

हम बात करेंगे महिलाओं की। 

               चाहरदीवारी के भीतर

                लुटती पिटती और घुटती

              महिलाओं की नहीं,अपितु

              अपने सम्मान के लिए

         आवाज बुलन्द करने वाली महिलाओं की।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

हम बात करेंगे महिलाओं की।

            युद्ध में जीती हुई और

            हरम में पलती हुई,

            महिलाओं की नहीं,अपितु

            रणक्षेत्र में दुश्मनों को धूल चटाती

           विदुषी वीरांगनाओं की।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

हम बात करेंगे महिलाओं की।

            चुपके -चुपके सिसकती और

            गर्भ में घुटती

             महिलाओं की नहीं,अपितु

             आसमान में उड़ती,गगन को चूमती,

            अंतरिक्ष में घूमती महिलाओं की।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

हम बात करेंगे महिलाओं की।

- श्रीमती लक्ष्मी चौहान 

यह भी पढ़िए -

और अधिक प्रेरणादायक कविता एवं लेख पढ़े -


एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

आपको पोस्ट कैसी लगी , अपने सुझाव अवश्य दर्ज करें।